दिल्ली आर्य प्रतिनिधि सभा

Just another Jagranjunction Blogs weblog

136 Posts

58 comments

Reader Blogs are not moderated, Jagran is not responsible for the views, opinions and content posted by the readers.
blogid : 23256 postid : 1300811

बंगाल! जारी है हिंसा और पलायन

Posted On: 19 Dec, 2016 में

  • SocialTwist Tell-a-Friend

हैदराबाद, दादरी और जेएनयू की तरफ दौड़ने वाले बुद्दिजीवी पत्रकार पिछले कई दिनों से बंगाल के धुलागढ़ का रास्ता पूछ रहे हैं। खबर है कि कोलकाता से मात्र 28 किलोमीटर दूर हावड़ा जिले के धुलागढ़ इलाके के बानिजुपोल गाँव में पिछले मंगलवार को मिलाद-उल-नबी के जुलूस के दौरान जुलूस में शामिल लोगों ने घरों में बम फेंके, तोड़फोड़ की लूटपाट कर लोगों के घरों से नकदी और कीमती सामान चुराकर ले गये। जिस कारण हिन्दुओं का एक बड़ा वर्ग वहां से पलायन कर रहा है। फिलहाल प्रशासन मौन है और वहां की मुख्यमंत्री नोटबंदी में उलझी हैं। अवार्ड लौटने वाले पत्रकार, साहित्कार, लेखक साइबेरियन पक्षियों की तरह वापस अपने घर लौट चुके हैं। एक अखलाक पर  यू.एन.ओ को चिट्ठी लिखने वाले उत्तर प्रदेश के बड़े नेता की इस मामले में शायद कलम की स्याही सूख चुकी है। इस मामले में न तो पिछले हफ्ते से मीडिया की वो मेज सजी दिखी जिन पर बैठकर लोग सहिष्णुता पर लम्बे-लम्बे वक्तव्य दे रहे होते हैं। दादरी जाकर मोटी रकम के चेक थमाने वाले नेता शायद बंगाल के धुलागढ़ का रास्ता भूल गये हों!

साम्प्रदायिक हिंसा के बीच आज धुलागढ़ अकेला है। उजड़े हुए घर और बर्बादी का मंजर है। जिसे लोग वहां आसानी से देख सकते हैं। गाँव में पसरा सन्नाटा इस बात का गवाह है कि हिंसा का मंजर कितना खौफनाक रहा होगा। असहिष्णुता के वो ठेकेदार जो पिछले दिनों जे.एन.यू. से एक ‘नजीब’ के गायब होने पर मीडिया की मेज पर कब्जा जमाये बैठे थे आज सैकड़ों निर्दोष गाँववासियों के पलायन पर मौन क्यों? ममता के राज में ‘सोनार बांग्ला बर्बाद बांग्ला’ बन गया है। बंगाल में आज वो हो रहा है जो शायद कभी मुस्लिम आक्रांताओं के समय में भी नहीं हुआ होगा! पिछले दिनों ममता सरकार द्वारा दुर्गा पूजा पर अभूतपूर्व प्रतिबन्ध लगाये गए थे। उच्च न्यायलय के हस्तक्षेप के कारण हिन्दू समाज ने चौन की सांस ली थी। परन्तु, मुस्लिम पर्सनल बोर्ड द्वारा भड़काए गए जेहादियों ने मुस्लिम बाहुल क्षेत्रों में हिंसा का अभूतपूर्व तांडव किया। बंगाल के पचासियों स्थानों पर हिन्दुओं पर अभूतपूर्व अत्याचार किये थे। मालदा जिले के कालिग्राम, खराबा, रिशिपारा, चांचलय मुर्शिदाबाद के तालतली, घोसपारा, जालंगी, हुगली के उर्दि पारा, चंदन नगर, तेलानिपारा, 24 परगना के हाजीनगर, नैहाटीय पश्चिम मिदनापुर गोलाबाजार, खरकपुर, पूर्व मिदनापुर के कालाबेरिया, भगवानपुर, बर्दवान के हथखोला, हावड़ा के सकरैल, अन्दुलन, आरगोरी, मानिकपुर, वीरभूम के कान्करताला तथा नादिया के हाजीनगर आदि पचास से ज्यादा स्थानों पर हिन्दुओं पर अमानवीय अत्याचार किए गए थे। इसी कड़ी में अब धूलागढ़ का नाम भी जुड़ गया है।

राज्य सरकार को स्मरण होगा कि कोलकाता के एक मौलवी ने मांगे पूरी न होने पर उन्हें कैसे धमकाया गया था। थोड़े दिन पहले ही कालिग्राम और चांचल में हिंसा को रोकने वाले पुलिस वालों और जिलाधीश को किस प्रकार पीटा गया और पुलिस स्टेशन को लूट लिया गया था,  शायद यह इनकी मानसिकता का जीता जगाता उदहारण है। जेहादियों पर कार्यवाही करने में अक्षम सरकार पीड़ित हिन्दुओं पर ही झूठे मामले दर्ज कर खानापूर्ति कर रही है। हाल के दिनों में पश्चिम बंगाल से सटे बांग्लादेश से एक रिपोर्ट के अनुसार खबरें आ रही थीं कि जेहादी मानसिकता से ग्रस्त लोगों के द्वारा की जा रही हिंसा से रोजाना 632 हिन्दू बांग्लादेश छोड़ रहे हैं। जोकि भारत में अपने लिए सुरक्षित स्थान खोज रहे हैं। अब सवाल यह है कि यदि वो बांग्लादेश छोड़कर भारत में बसते हैं तो उनकी सुरक्षा की जिम्मेदारी कौन लेगा? क्योंकि राजनीति के तुष्टीकरण के कारण भारत में ही भारतीय हिन्दुओं के हितों पर ही तलवार सी लटकती दिखाई दे रही है।

कश्मीर से पंडित निकाले गये! राजनीति मौन रही। केरल में साम्प्रदायिकता का सरेआम तांडव हुआ! सब खामोश रहे। कैराना पर राजनितिक दलों ने वहां के हिन्दुओं के पलायन को राजनीति से प्रेरित बताकर अपना वोट बैंक साधा! सब चुप रहे। लेकिन कब तक? एक-एक कर क्षेत्र पर क्षेत्र खाली हो रहे हैं यह तुष्टीकरण की राजनीति है या झूठी धर्मनिरपेक्षता का शोर कब तक सन्नाटे से निकलती सिसकियों को दबाएगा। क्या अब राजनेताओं और धर्मनिरपेक्ष दलों को नहीं समझ जाना चाहिए कि इन जेहादियों को अपनी मनमानी करने के लिए एक सुरक्षित क्षेत्र की तलाश है? दुनिया के किसी भी हिस्से में इनका लोकतंत्र में विश्वास नहीं है और ना ही संविधान के धर्मनिपेक्षता के ढ़ांचे का ख्याल। ये लोग सिर्फ एक पुरातन परम्परा जो इनकी नहीं बल्कि इन पर जबरन लाधी गयी है उसका बचाव हिंसक तरीके से कर रहे हैं।

हमेशा सच्चे लेखन पर लेखक का धर्म तलाशा जाता है लेकिन यहाँ तो तुफैल अहमद जैसे निर्भीक विचार रखने वाले मुस्लिम विद्वान खुद लिख रहे हैं कि इस्लाम के मानने वाले एक बड़े वर्ग को मजहब नहीं अपने लिए एक क्षेत्र की तलाश है। तुफैल लिखते हैं कि जब मक्का में गैर मुस्लिमों ने प्रोफेट मोहम्मद से कहा कि आप और हम मक्का में साथ-साथ रह सकते हैं, किन्तु मोहम्मद ने कहा यह नहीं हो सकता, आपका धर्म अलग है, रहन-सहन अलग है, हम साथ नहीं रह सकते और यहीं से द्वि-राष्ट्र सिद्धांत का जन्म हुआ। वहां अब कोई जूं नहीं बचे, न कोई यहूदी बचे। ईरान में पारसी नहीं बचे, अफगानिस्तान में, बलूचिस्तान में, पाकिस्तान में कहीं हिन्दू नहीं बचे। लाहौर सिक्ख महानगर था, अब नहीं है। वही क्रम आज भी जारी है। कश्मीर में, कैराना में, केरल में, प.बंगाल में क्या हो रहा है? मेरे पास केवल सवाल हैं, जबाब नहीं।…राजीव चौधरी

Rate this Article:

1 Star2 Stars3 Stars4 Stars5 Stars (No Ratings Yet)
Loading ... Loading ...

1 प्रतिक्रिया

  • SocialTwist Tell-a-Friend

Post a Comment

CAPTCHA Image
*

Reset

नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

rameshagarwal के द्वारा
December 21, 2016

जय श्री राम राजीव जी आपने सच लिखा देश को बर्बाद करने में कांग्रेस और सेकुलर ब्रिगेड का बहुत हाथ है ममता तो प्रधानमंत्री  बन्ने के ख्वाब देख रही इसीलिये प्रदेश में जेहाडियो को खुली छूट है प्रशासन मौन रहता नकली नोट वही से आते वहां अफीम की खेती होती कुर्सी के लिए नेता देश बेच दे मीडिया भी बिका है सबसे खतरनाक बुद्दिजीवी है आज़म खान,ओवेसी ममता केजरीवाल राहुल का महिमामंडित करते इसी लिए पकिस्तान खुश बीजेपी शाशित प्रदेशो और गुजरात की खबर जरूर बड़ा कर दिखायेंगे ऐसी पत्रकारिता देश के किये खतरनाक ममता तो कुर्सी के लिए मुसलमान भी बन जाए.


topic of the week



latest from jagran